आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार ( Ayurvedic Method to Reduce High Blood Pressure )

आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार - Ayurvedic Method to Reduce High Blood Pressure 


आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार

आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार :- आज के समय में ब्लड प्रेशर की समस्या आम बीमारी है और सबसे बड़ी बात ये है कि ये समस्या आमतौर पर डायग्नोज़ नहीं हो पाती है सामान्यतह इसकी वजह हाइपरटेंशन ( Hypertension ) बतायी जाती है किन्तु आयुर्वेद के अनुसार सभी रोगों की जन्मदाता शरीर के तीन विकार है वात, पित्त और कफ होता है आयुर्वेद के अनुसार उच्च रक्तचाप जैसा कोई रोग नहीं होता बल्कि इसको शिरोगत वात रोग कहते है रक्त वाहिनियोंं और घमनियोंं पर अधिक दबाब पड़ना और उनका कठोर हो जाना शिरोवात रोग होता है अर्थात वायु के कुपित होने से शरीर में ये रोग उत्पन्न होता है जिसका निवास स्थान बड़ी आत (large intestine) होता है 

आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार



उच्च रक्तचाप लक्षण

रोगी के पीछे कनपटियोंं यानी कान के पीछे दर्द होना, ये दर्द कभी कम या ज्यादा हो सकता है
रोगी को सुबह और शाम चक्कर आना
हार्ट की गति बढ़ जाना तथा छाती में दर्द होना
उच्च रक्तचाप में गुस्सा आना, बेचेनी, घबराहट, शिर में दर्द होना, चिडचिडापन रहना, किसी काम पर ध्‍यान एकाग्र न हो पाना
स्मरण शक्ति कम होने लगती है
निद्रा कम आना
मल से बदबू अधिक आती है तथा अनियमित मल आता है
पेशाब की मात्रा कम आना

आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार :-


आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार


उच्च रक्तचाप के कारण

इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में वायु की अधिकता है और शरीर में वायु बनने के कारण समय पर न उठना अर्थात देर तक सोना, समय पर मल त्याग न करना, व्यायाम कम करना, समय पर विश्राम न करना, अधिक शोक, अधिक मानसिक चिंता और स्त्रियों में मासिक घर्म का बंद हो जाना, आरामदायक जीवन यापन इत्यादि वायु को कुपित करने के विशेष कारण है

उच्च रक्तचाप का समाधान
वैसे तो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के बहुत से घरेलु उपचार है किन्तु वायु को यदि कुपित होने से रोकना है तो सर्वप्रथम कायिक रूप से मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करेंं
नित्य सुबह टहलने जाए, नित्य तिल का तेल लगाकर उसके बाद गुनगुने पानी से स्नान करेंं, रोज सूर्यास्‍त से पहले भोजन करलेंं और सोने से पहले साहित्य पड़ने आदत डालेंं ताकि मन शांत रहे
इसके अलावा आयुर्वेद के कुछ उपाय भी है जैसे की पहले रोगी का स्नेहन करायेंं जिसके लिए बादाम का तेल को कच्चे दूध में मिलाकर उपयोग करे फिर रोगी का स्वेदन गर्म पानी से कराये और सर्पगंधा का सेवन करे तथा नियमित रूप से लहसुन खाने से भी वायु शांत रहती है और रक्त चाप कण्ट्रोल में रहता है
रोज सुबह खाली पेट गिलोय का जूस और ग्वारपाठा ( Aloe vera ) का जूस 15-15 ml मिलाकर नित्य लेंं अवश्य लाभ मिलेगा, स्वर्ण भस्म, चांदी की भस्म, चंद्रभागा, जठामासी, शंखपुष्पी, अर्जुन त्वक इत्यादि औषधी बहुत लाभदायक है
किन्तु इस समस्या से बचने के लिए किसी कुशल वैद् द्वारा सही तरीके से आयुर्वेदिक इलाज कराकर इससे छुटकारा पाया जा सकता है

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