सफेद चीनी अपने शरीर के लिए हानिकारक क्यो ? और इससे कैसे बचें।

सफेद चीनी के नुकसान 

सफेद चीनी अपने शरीर के लिए हानिकारक क्यो ? और इससे कैसे बचें।

आजकल भारतवर्ष में ही नहीं अपितु संसार के कोने-कोने में सफेद चीनी का प्रचार अपनी जोरो से बढ़ रहा है कि सामने देसी गुड़ को कोई पूछता नहीं स्वास्थ्य की दृष्टि से यह अच्छा नहीं है राष्ट्र संघ की स्वास्थ्य संबंधी कमेटी की रिपोर्ट में ने बताया कि आजकल जो चीनी साधारण जनता घर में इस्तेमाल करती है इसमें खनिज पदार्थ और विटामिन अभी नहीं होते अतः स्वास्थ्य के लिए हानी कारक है इसीलिए चीनी का खाया जाना बंद करके उसके स्थान पर और कुछ नहीं मिलने पर आलू और शकरकंदी का उपयोग किया जा सकता है 

सफेद चीनी शरीर में आवश्यक शर्करा की पूर्ति नहीं करती यह एक भ्रम फैला हुआ है कि हमारे शरीर के लिए प्रतिदिन पौष्टिक तत्व जैसे प्रत्यामिन, वसा, कार्बोज आदि के साथ साथ जो शर्करा की आवश्यकता पड़ती है वह सफेद चीनी से प्राप्त होती है। नहीं, जिस शर्करा की हमारे शरीर को आवश्यकता होती है जिस शर्करा से हमारे शरीर में गर्मी रहती है अथवा जिस शर्करा से हमारी मांसपेशियों को शक्ति मिलती है। वह हमें मीठी वनस्पतियों, फलों, सूखे मेवे, जैसे किशमिश, अंजीर, खजूर, आदि से प्राप्त होती है। ना की मिल में बनी सारहीन कृत्रिम चीनी से जो शरीर में जाकर लाभ के बदले हानी ही पहुंचाती है। इस तरह हम देखते हैं की मिल की सफेद चीनी जिसकी खपत हमारे घरों में आजकल साधारण रूप से होती है बिल्कुल बेकार अनावश्यक एवं हानिकारक है।

सफेद चीनी जहर है।

चीनी अधिकतर ईख, चुकंदर, अंगूर, गाजर, गन्ने आदि से बनाई जाती है। यह वस्तुए स्वयं स्वास्थ्यवर्धक है। लेकिन मिल में बनाई गई चीनी रोगउत्पादक तथा आयुनाशक हो जाती है, कारन, साफ करने की प्रक्रियाओ द्वारा मशीन के संपर्क में आकर इनके पोस्टिक तत्व, खनिज, लवन, क्षार तथा अन्य जीवन पोषक तत्व जैसे खाद्योज, सोडियम, मैग्नीशियम, लोहा आदि नष्ट हो जाते हैं और एक सारहीन सफेद रवेदार द्रव्य बचा रहता है, जो शरीर में सड़ने, रक्त को दूषित करने तथा स्नायु को विषाक्त कर उन्हें नष्ट करने के अतिरिक्त और किसी काम में नहीं आता, क्योंकि इस द्रव्य में कैल्शियम की मात्रा अत्याधिक बड़ी हुई होती है।

हम बहुत से गन्ने उस का रस व गुड एक दफा में सब के सब नहीं खा सकते। पर इतने ही गन्नों की बनी चीनी हम एक दफा में ही आसानी से चट कर जाते हैं। इससे सिद्ध हुआ कि एक दफा में जितनी प्राकृतिक चीनी हमें स्वाभाविक तौर पर लेनी चाहिए उससे कहीं अधिक चीनी ले लेते हैं। सफेद चीनी तो तत्व हिन, सारहीन एवं विषतुल्य होती है। इसे खाकर अजीर्ण, बहुमूत्र, पायरिया, जुखाम, तथा अन्य रोगों के शिकार हम आए दिन बने रहते हैं। 

सफेद चीनी को हजम होने में बहुत समय लगता है। वह पाकस्थली में भी नहीं पचती। वह हजम होती है केवल शुद्ध अंतड़ीयो के द्वारा यही कारण है कि अधिक चीनी के खाने से पाकस्थली बहुत कुपित हो उठती है। और कभी कभी तो पाकस्थली में क्षत तक उत्पन्न ना हो जाते हैं। सफेद चीनी पाकस्थली को कितना नुकसान पहुंचाती है इसी से भली-भांति जाना जा सकता है की उसे त्वचा पर रख देने से चमड़े पर प्रदाह उत्पन्न हो जाता है।

सफेद चीनी बड़ी गर्म होती है। यह शरीर की रग रग को फूंक देती है, अतः चीनी को जो ठंडी कहता है वह भूल करता है। जैसे-जैसे गन्ने का रस साफ होकर अपना नैसर्गिक रूप छोड़ता जाएगा वैसे वैसे उसमें गर्मी बढ़ती ही जाएगी तथा उसके गुण वाले द्रव्य नष्ट होते जाएंगे। हमारी राय में सफेद चीनी लाल मिर्च से भी हानिकारक है। इससे वीर्य पानी की तरह पतला होकर स्वप्नदोष, प्रमेय, मूत्रव्याधि, खून का अधिक या कम दबाव, स्नायुओ की शिथिलता आदि को जन्म देता है। वीर्य व्याधि से ग्रस्त रोगी तथा प्रदर पीड़ित महिलाएं चीनी और खटाई का सेवन छोड़ते ही अद्भुत लाभ का अनुभव करते हैं।

डॉक्टर विलियम ल्योनार्ड ने चीनी को मदिरा के समान उत्तेजक द्रव्य माना है जिससे अंग-प्रत्यंग उत्तेजित हो उठते हैं और एक जोश-सा पैदा हो जाता है

डॉक्टर लीलावती गर्ग का अनुभव है, कि अधिक चीनी खाने वाले व्यक्ति अस्थियों, आंतो तथा फेफड़ों के क्षय रोग से पीड़ित होते हैं। इससे हड्डियां तक गल जाती है। चीनी खाने से विद्यार्थियों के मस्तिष्क खराब हो जाते हैं और उनकी स्मरण शक्ति मारी जाती है।

इसके अतिरिक्त सफेद चीनी खाने वालों के दांत जल्द खराब हो जाते हैं। और समय से पहले ही टूट भी जाते हैं

चीनी खाने की आदत कैसे छुड़ाए

चीनी खाने की आदत कैसे छोड़ें अथवा चीनी की जगह क्या खाया जाए? अब इस पर थोड़ा सा प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे।

जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है प्राकृतिक चीनी हमें दूध, शहद, मीठे फलों, खजूर,देसी गुड चुकंदर, गाजर, मीठी मेवे, जैसे किशमिश, छुहारा मुनक्का, आदि को प्राकृतिक रूप में सेवन करने से मिलती है। जो स्वास्थ्यवर्धक होती है। अतः चीनी के स्थान पर इन वस्तुओं में से एकाद का, जो मिल जाए, सेवन करना बुद्धिमानी का काम होगा।

दूध में दुग्ध शर्करा की मात्रा प्राकृतिक होती ही है। अतः दूध में ऊपर से चीनी डालकर पीना बिल्कुल गलत तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। और अगर दूध को मीठा करना ही हो तो वैसी दशा में शहद या नारंगी आदि का मीठा रस मिलाया जा सकता है।

चीनी के बदले शहद का उपयोग लाभ के साथ किया जा सकता है। शहद के गुण अनेक है और यह एक बहुत अच्छी खाद्य सामग्री है। इससे सैकड़ों रोग दूर होते हैं। शहद एक स्वत: पचा हुआ भोजन है, जिसे पचाने के लिए पाचन शक्ति को रत्ती भर की भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। जीभ पर रखते ही यह रक्त के साथ मिल जाता है। ह्रदय को शक्ति देने के लिए ग्लूकोज से भी बढ़कर है। इसमें 42% विशुद्ध ग्लूकोज होता है। यही कारण है के आयुर्वेद की अधिकांश दवाइयों के साथ मधु देने का निर्देश है। शहद का सेवन जाड़े के दिनों में विशेष लाभदायक होता है।

चीनी के बदले मीठे फल तथा मेवे का उपयोग भी किया जा सकता है। ताजे मीठे फलों का जितना गुणगान किया जाए, थोड़ा ही है। इसी तरह सूखे मेवों में किशमिश की तरह निर्दोष क्षार संसार में अन्य कीसी खाद्य में मिलना दुर्लभ है। सुखी किशमिश को जल में भिगो देने से जब वह फूल जाती है तब उसमें ताजे अंगूर जैसा रस पैदा हो जाता है। आंत, वातव्याधि, मूत्र अंतड़ियों की बीमारी, सांस फूलना, कोष्ठबद्धता इत्यादि रोगों में यह विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है।

डॉक्टर कुलरंजन मुखर्जी की राय में सभी गुडो में खजूर का गुड़ सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि इसमें विटामिन बी बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसके अतिरिक्त शरीर गठन के लिए प्रत्यामीन, रक्तनिर्माणकारी लौह तथा दांत और अन्य हड्डियों का प्रधान उपादान कैल्शियम इसमें विशेष रूप से होता है और यह आसानी से पच जाने वाला और कोष्ठपरिस्कारक भी है।

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